Tuesday, 5 April 2016

काश तुम सुंदर होती
दुनिया ना इतनी अंधी होती
दर्द ना इतना भीतर होता
हस्सी ना इतनी खामोश होती
शक़ ना इतना गहरा होता

काश तुम सुंदर होती
रातें ना इतनी तन्हा लगती
चाँद ना इतना फीका लगता
बातें ना इतनी अधूरी लगती
सच ना इतना कड़वा लगता

काश तुम सुंदर होती
कम-से-कम डर ना लगता चेहरो से
भागती ना यूँ आईने से
मुस्कुरा कर कुछ तो बोल ही लेती
गिरते संभलते चल तो लेती
कोई सहारा तो रहता
सुकून के शब्द जो कहता
अब बस यही सोचती रहती हो
काश मैं सुंदर होती